स्वामी क्रियानंद से मैंने जो सबक सीखे, भाग 1

17 अप्रैल, 2026

साल 2026 के दौरान, आनंद संघ में हम स्वामी क्रियानंद जी के जन्म की शताब्दी (सौवीं वर्षगांठ) मनाएंगे।उनके जीवन को श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले प्रमुख कार्यक्रम जून में आनंदा विलेज में, अगस्त में आनंदा असिसी में और सितंबर में भारत में आयोजित किए जाएंगे। इन समारोहों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने वालों के अलावा, सभी लोग लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से इन्हें देख सकेंगे।

आने वाले महीनों में, ज्योतिष और मैं अपने कई ब्लॉग स्वामीजी को समर्पित करेंगे- कि कैसे उन्होंने हमारे जीवन को बदल दिया, और कैसे उनके विनम्र शिष्यत्व ने गुरु की शिक्षाओं को दुनिया तक पहुँचाया। आज मैं आपके साथ अनंदा में अपने शुरुआती कुछ वर्षों के दौरान सीखे गए कुछ सबक साझा करुँगी, और यह भी बताऊंगी कि आप उन्हें अपने जीवन में कैसे लागू कर सकते हैं।

मैं 4 जुलाई, 1969 को आनंदा पहुँची और स्वामी जी द्वारा प्रत्येक सप्ताह के अंत में  The Seclusion Retreat (विश्व भर में फैले आनंद समुदायों का जन्मस्थान है और यह उत्तरी कैलिफोर्निया की सिएरा पहाड़ियों की तलहटी में 72 एकड़ क्षेत्र में स्थित है।) में दिए जाने वाले प्रवचनों में नियमित रूप से भाग लेने लगी। अच्छी शिक्षा प्राप्त होने के कारण, मुझे यकीन नहीं था कि वे मुझे और क्या दे सकते हैं। लेकिन जिस पहले ही क्षण मैंने उनका प्रवचन सुना, ऐसा लगा जैसे मेरे मन में एक नया द्वार खुल गया हो। मैं जान गई कि वे मुझे उस ज्ञान से कहीं अधिक उच्चतर ज्ञान प्रदान कर रहे हैं जो मैंने पहले कभी प्राप्त नहीं किया था।

उन्होंने वास्तविकता के सच्चे स्वरूप, जीवन के उद्देश्य, अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के तरीके और स्थायी सुख पाने के मार्ग के बारे में बात की। उन्होंने जो कुछ भी साझा किया—और जिस तरह से साझा किया—वह इतिहास, कला, साहित्य और विज्ञान की गहरी समझ से ओतप्रोत था। मुझे ऐसा लगा कि मेरी वास्तविक शिक्षा अब शुरू हुई है।

मेरे कॉलेज के वर्षों के दौरान, अस्तित्ववादी दर्शन (Existential philosophy)—जो यह मानता है कि कोई भी वस्तुनिष्ठ सत्य या मूल्य नहीं होते—व्यापक रूप से स्वीकार की जाती थी। स्वामीजी ने मुझे इतनी गहराई से यह विश्वास दिलाया कि सच्चे मूल्य और जीवन का उद्देश्य वास्तव में अस्तित्व में हैं, कि उस क्षण से मेरे जीवन की दिशा पूरी तरह बदल गई।

आप इसे अपने जीवन में कैसे लागू कर सकते हैं?

योगानंद और स्वामीजी की पुस्तकें पढ़कर और उनके प्रवचन सुनकर इन शिक्षाओं का अध्ययन करने के लिए समय निकालें। जब आप ऐसा करें, तो अपना पूरा ध्यान दें और जो भी आपको सबसे अधिक सार्थक और प्रासंगिक लगे, उसे नोट कर लें। मैंने स्वामीजी के लगभग हर प्रवचन में नोट्स लिए, क्योंकि ऐसा करने से मुझे उनकी ज्ञान भरी बातों को और गहराई से आत्मसात करने में मदद मिली। फिर, इस बात पर विचार करें कि आप इस उच्चतर ज्ञान को अपने दैनिक जीवन में कैसे उतार सकते हैं।

क्रियानंद जी का प्रवचन सुनना एक अद्भुत अनुभव था—लेकिन उनके भजन सुनना भी उतना ही प्रभावशाली था। पहली बार जब मैंने इसे अनुभव किया, तो मुझे फिर से ऐसा लगा जैसे मेरे हृदय में एक नया द्वार खुल गया हो। स्वामी जी को एक सुरीली आवाज का वरदान प्राप्त था, लेकिन यह उससे कहीं अधिक था। उनके भजनों की जो मधुरता और  सादगी थी इससे पहले उन्होंने कभी नहीं सुना था। मैं महसूस कर सकती थी कि वे दूसरों के लिए प्रदर्शन के रूप में नहीं गा रहे थे, बल्कि ईश्वर के प्रति अपने गहरे प्रेम से गा रहे थे, और कृपापूर्वक हमें उसकी एक झलक दिखा रहे थे।

मुझे अगस्त की एक बेहद गर्म रविवार की सुबह याद है, जब स्वामी जी रिट्रीट में सत्संग का नेतृत्व कर रहे थे। मंदिर में बहुत गर्मी थी और लोगों की भीड़ थी, इसलिए घुटन महसूस हो रही थी। तभी, जैसे ही उन्होंने भजन शुरू किया, मुझे कमरे में एक ठंडी हवा का झोंका महसूस हुआ—जैसे हम सब ईश्वर के प्रेम की लहर में तरोताजा और उत्साहित हो रहे हों।

हालाँकि मैंने कभी कोई वाद्य यंत्र बजाना नहीं सीखा था, फिर भी मैंने एक हारमोनियम खरीदा और उसे बजाना सीखा ताकि मैं अकेले में भजन कर सकूँ। मैं यह तो नहीं कह सकती कि मैंने इसमें महारत हासिल कर ली, लेकिन इतना ज़रूर सीख लिया कि स्वामीजी द्वारा गाए गए सुंदर भजनों को घंटों तक आनंदपूर्वक बजा सकूँ। भजन करने से मेरी स्वाभाविक भक्ति जागृत हुई और मुझे यह विश्वास हुआ कि मैं आत्म-अभिव्यक्ति के नए रास्ते सीख सकती हूँ और उनका आनंद ले सकती हूँ।

आप अपने जीवन में प्रेरणादायक संगीत को कैसे शामिल कर सकते हैं?

गुरु, स्वामीजी और अन्य लोगों के कीर्तनों की रिकॉर्डिंग सुनें। ईश्वर के प्रति उनके प्रेम की गहराई को महसूस करने का प्रयास करें, फिर शांतिपूर्वक ध्यान में बैठें और ईश्वर को अपना प्रेम अर्पित करें। यदि संभव हो, तो स्वयं कीर्तनों में भाग लें और कोई वाद्य यंत्र बजाने का प्रयास करें—हारमोनियम, ढोल, कीर्तल (झांझ), या बस तालबद्ध तरीके से ताली बजाएं। महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने हृदय में भक्ति जागृत करें।

आनंद संघ में अपने शुरुआती वर्षों के दौरान, स्वामीजी ने हमें हर चीज़ में ईश्वर के ज्ञान और प्रेम को खोजना सिखाया। जैसा कि योगानंद ने अपनी आत्मकथा में लिखा है : “ईश्वर प्रेम है; सृष्टि के लिए उनकी योजना केवल प्रेम में ही निहित हो सकती है। क्या यह सरल विचार, किसी भी विद्वतापूर्ण ब्रह्मांडीय ग्रंथ से कहीं अधिक, मानव हृदय को शांति प्रदान नहीं करता? हर संत जिसने वास्तविकता के मूल को भेद दिया है, उसने गवाही दी है कि एक दिव्य सार्वभौमिक योजना विद्यमान है, और वह सुंदर और आनंद से परिपूर्ण है।”

स्वामीजी से मैंने जो दो गुण सीखे—ज्ञान और प्रेम—उन्होंने मेरे शेष जीवन की नींव रखी है।

कृतज्ञता सहित,

नयास्वामी देवी

नयास्वामी देवी
नयास्वामी देवी पहली बार 1969 में आनंद के संस्थापक स्वामी क्रियानंद से मिलीं और उन्होंने अपना जीवन आध्यात्मिक पथ को समर्पित कर दिया। 1984 में, उन्होंने और उनके पति ज्योतिष ने आनंद संघ वर्ल्डवाइड के आध्यात्मिक निदेशक के रूप में एक साथ सेवा शुरू की। 2013 में क्रियानंदजी के देहांत के बाद से, ज्योतिष और देवी ने योगानंद द्वारा उन्हें सौंपे गए महान कार्य को आगे बढ़ाया है।
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