13 फ़रवरी, 2026
जब हम अनुकूलन (ईश्वरीय सामंजस्य) की कला सीख लेते हैं, तब आध्यात्मिक विकास सहज हो जाता है।
हमारी पिछली रविवार का सत्संग इसी विषय पर था। अपनी व्यक्तिगत इच्छा “जो प्रायः अहंकार की इच्छाओं और कर्मों की परतों से ढकी होती है” का अनुकूलन —ईश्वर और गुरु की दिव्य मार्गदर्शित इच्छा के प्रति समर्पण ही आध्यात्मिक पथ का हृदय और आत्मा है। शेष सब कुछ दूसरे दर्जे का।
हर रविवार हम अपने “प्रातः कालीन” सत्संग की शुरुआत वैदिक हवन से करते हैं, जिसमें हम प्रतीकात्मक रूप से अपनी भक्ति और पूर्व कर्मों को अग्नि में अर्पित करते हैं। इसके बाद शुद्धि-समारोह होता है, जो आत्म-समर्पण का अधिक व्यक्तिगत रूप है। इसमें साधक एक आचार्य के पास जाकर दोहराते हैं, “मैं ईश्वर की कृपा से पवित्र होना चाहता हूँ।” और आचार्य उत्तर देते हैं, गुरु कहते हैं, “अपना हृदय मेरे लिए खोलो, और मैं उसमें प्रवेश करुँगा और तुम्हारे जीवन का उत्तरदायित्व लूँगा।’”
यदि हमारे पास कोई अन्य आध्यात्मिक साधना न भी हो, तो केवल अपना हृदय ईश्वर के लिए खोल देना और उन्हें अपने जीवन का संचालन करने देना ही पर्याप्त है। यद्यपि हमें इसके लिए किसी विशेष समारोह या मध्यस्थ की आवश्यकता नहीं है। वास्तव में, यह दैनिक—और सच कहें तो निरंतर—अभ्यास होना चाहिए। इसे अनेक प्रकार से किया जा सकता है- प्रेमपूर्वक ईश्वर या गुरु का स्मरण करके, ध्यान के अंत में पूर्ण आत्म-समर्पण का अनुभव करके, या एकाग्रता और भक्ति के साथ कीर्तन करके।
उपलब्ध सैकड़ों भजनों में से, स्वामी क्रियानंद अक्सर “(मेरे हृदय का द्वार) ” Door of My Heart गाते थे, विशेष रूप से अपने जीवन के अंतिम वर्षों में। उस समय तक, उनका हृदय इतना खुला था कि वे शायद ही कभी योगानंद जी के बारे में बिना आँखों में आँसू लाए बात कर पाते थे। इस भजन के शब्द कुछ इस प्रकार हैं:
अपने दिल का द्वार खोले रखूं मैं तेरे लिए
आजाओ ना आजाओ ना बस एक बार तुम आजाओ ना
क्या मेरे दिन बीत जाएंगे बिन तेरी झलक देखे
रात और दिन रात और दिन, ढूंडू तुझको रात और दिन
Door of my heart, open wide I keep for Thee.
Wilt Thou come, wilt Thou come, just for once, come to me?
Will my days fly away without seeing Thee, my Lord?
Night and day, night and day, I look for Thee night and day.
यह भजन संभवतः मेरा भी व्यक्तिगत प्रिय है। पिछले सप्ताह जब हम एक भारतीय मित्र के साथ चाय पर बैठे थे, तब उन्होंने इस भजन से जुड़ी एक सुंदर घटना सुनाई। वे भारत में आनंद संघ के एक केंद्र के मुख्य सदस्यों में से हैं और हाल ही में एक कीर्तन में सम्मिलित हुए थे, जहाँ समूह ने इसी भजन को अत्यंत गहराई से गाया।
कीर्तन के अगले दिन, उन्हें छाती में कुछ दर्द होने लगा। चूंकि उसी सप्ताह उनकी एक अंतरराष्ट्रीय यात्रा तय थी, इसलिए उन्होंने सोचा कि हृदय रोग विशेषज्ञ (cardiologist) को दिखाना बुद्धिमानी होगी। एक बेहतरीन डॉक्टर थे जिन्होंने कभी उनकी माँ की मदद की थी, लेकिन वह बात सालों पुरानी थी और हमारे मित्र को उनका नाम याद नहीं आ रहा था। इसलिए उन्होंने नजदीकी अस्पताल जाने का फैसला किया।
रास्ते में, एक दोस्त ने उन्हें फोन किया और कहा, “मैंने सुना है कि तुम्हें छाती में दर्द हो रहा है—तुम डॉ. _____ को क्यों नहीं दिखाते?”—और उन्हें उनकी माँ के उसी कार्डियोलॉजिस्ट का नाम बताया। हमारे मित्र तुरंत वापस मुड़े, उस डॉक्टर के पास गए, और पता चला कि उन्हें हल्का दिल का दौरा पड़ा था। एक त्वरित सर्जिकल प्रक्रिया ने समस्या को ठीक कर दिया।
जब हम गुरु के लिए अपना हृदय खोलते हैं, जैसा कि हमारे मित्र ने किया था, तो गुरु वास्तव में प्रवेश करते हैं और हमारे जीवन का ले लेते हैं। देवी और मैंने पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कई कहानियाँ सुनी हैं। जब हम ईश्वर में पूर्ण विश्वास रखते हैं, तो जादुई चीजें घटित होने लगती हैं। ‘एक योगी की आत्मकथा‘ (Autobiography of a Yogi) में एक पूरा अध्याय है—”वृंदावन में दो निर्धन बालक”—जो इस सत्य को समर्पित है कि ईश्वर में पूर्ण विश्वास हमारे जीवन में चमत्कार ला सकता है।
हमारे जीवन में ईश्वर और गुरु के चमत्कारी हस्तक्षेप को देखने के लिए हमें केवल किसी गुरु —या किसी मित्र—की ओर देखने की आवश्यकता नहीं है। जिन्होंने अपना हृदय उनके लिए खोल दिया है, उनके जीवन में यह दिव्य अनुकंपा स्वयं प्रकट होती है। हम सभी ने ईश्वर की अनेक कृपाएँ अनुभव की हैं। एक क्षण रुक कर अपने जीवन पर विचार करें—विशेषकर इस बात पर कि आप इस आध्यात्मिक मार्ग पर कैसे आए। यदि आप सजगता से देखेंगे, तो पाएँगे कि आपके जीवन में पहले ही अनेक शांत और सूक्ष्म चमत्कार घटित हो चुके हैं।
“अपना हृदय मेरे लिए खोलो, और मैं उसमें प्रवेश करुँगा और तुम्हारे जीवन का उत्तरदायित्व लूँगा।’”—यह कोई साधारण वचन नहीं है। यह सृष्टि की सबसे शक्तिशाली शक्तियों में से एक है—और वास्तव में यही एकमात्र आवश्यक आध्यात्मिक साधना है। तकनीकें, दृष्टिकोण, और गुरूओं का समस्त ज्ञान—ये सब सहायक मात्र हैं।
प्रेम ही वह सब कुछ है जिसकी तुम्हें आवश्यकता है।
खुले हृदय के साथ,
नयास्वामी ज्योतिष
नयास्वामी ज्योतिष
ज्योतिष और उनकी पत्नी, नयास्वामी देवी, Ananda Worldwide के आध्यात्मिक निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। योगानंद के दीर्घकालिक भक्त, उन्होंने चालीस से भी अधिक वर्षों तक स्वामी क्रियानंद के साथ मिलकर काम किया और आनंद के विश्वव्यापी कार्य का मार्गदर्शन करने के लिए उनसे व्यक्तिगत रूप से प्रशिक्षित हुए। उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप, रूस और भारत में अध्यापन और व्याख्यान दिए हैं। ज्योतिष और देवी, दोनों ही क्रियाचार्य हैं, जिन्हें स्वामी क्रियानंद ने लोगों को क्रिया योग की पवित्र कला में दीक्षित करने के लिए नियुक्त किया है। 2013 में स्वामीजी के देहांत के बाद से, ज्योतिष उनके आध्यात्मिक उत्तराधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
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